जयपुर. वसुंधरा राजे के इस्तीफा देने के बाद उनकी जगह नया चेहरा कौन होगा, यह सवाल भाजपा के नेताओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है। इस दौड़ में कई नेता हैं, लेकिन सबके अपने-अपने समीकरण हैं। कौन हो सकता है नेता, यह सवाल हाईकमान के लिए भी सिरदर्द बना हुआ है।
किसकी ताकत क्या, कमजोरी क्या ?
गुलाबचंद कटारिया : इंदौर अधिवेशन में पूर्व गृह मंत्री कटारिया का नाम तय हो चुका है। वसुंधरा समर्थक विधायकों ने ज्यादा विरोध नहीं किया तो उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। उनका विरोधी खेमा उनके नेता प्रतिपक्ष के रूप में पहले के कार्यकाल की विफलताएं गिना रहा है।
घनश्याम तिवाड़ी : उप नेता तिवाड़ी को बागडोर सौंपने का भी सुझाव है। इन दिनों वसुंधरा राजे से उनके समीकरण ठीक हैं। लेकिन कुछ प्रमुख नेताओं का विरोध है कि नेता प्रतिपक्ष और प्रदेशाध्यक्ष दोनों पदों पर ब्राrाण नहीं रखे जाएं।
डॉ. दिगंबरसिंह : वसुंधरा खेमा दिगंबरसिंह को चाहता है, लेकिन इससे वसुंधरा खेमा विभाजित हो सकता है। यह भी तर्क है कि उनका नाम तय होता है तो दोनों प्रमुख पदों पर भरतपुर के नेता आ जाएंगे और क्षेत्रीय असंतुलन हो जाएगा।
राव राजेन्द्रसिंह : आम सहमति वाला एक नाम राव राजेंद्र¨सह का भी है। लेकिन पार्टी में समझा जाता है कि वे तिकड़मबाजियों से दूर होने के कारण विधानसभा में फ्लोर मैनेजमेंट के दौरान कुछ दिक्कत में हो सकते हैं।
पद छोड़ा लेकिन ‘कद’ वही रहेगा
इस्तीफा भले ही दे दिया हो, नेता तो वही रहेंगी। — भवानीसिंह राजावत, विधायक
नए नेता का नाम पार्टी हाईकमान तय करेगा। — ओम बिड़ला, विधायक
जो इंदौर अधिवेशन में तय हुआ, उसी की पालना होगी। — वासुदेव देवनानी, विधायक
देवासी ने किया वाहन का उद्घाटन
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