रंगों का त्योहार होली शहर में आस्था के साथ मनाया जाएगा। शहर के विभिन्न इलाकों में होलिका दहन किया जाएगा। होली दहन स्थल पर संगीत के लिए डीजे आदि की व्यवस्था कर ली गई! धुलंडी के दिन लोग एक-दूसरे को स्नेह की गुलाल लगाकर गिले-शिकवे दूर करेंगे।शहरवासियों द्वारा होली की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। भक्त प्रहलाद की पूजा-अर्चना के बाद होली जलाई जाएगी। होलिका दहन पर बड़कूले की माला चढ़ाई जाएगी। महिलाएं हल्दी और सूत को होलिका का दर्शन करवाएंगी। बाद में इससे चौथ माता के डोर तैयार किए जाएंगे। होलिका में गेहूं की बालियां सेककर खाने तथा होली दहन के बाद कंडों से घरों मे धूप देने की परंपरा का भी निर्वाह किया इसके अलावा महाभारत में कृष्ण द्वारा युद्ध के समय अजरुन को दिए गए उपदेश वाली झांकी को भी लोग पसंद कर रहे हैं। तीसरी चीन की रेड ड्रेकन झांकी है। इसमें चीन द्वारा भारत को नुकसापहंचाए जाने के बारे में बताया है।
इसलिए सेकते हैं गेहूं की बालीं
इसलिए सेकते हैं गेहूं की बालीं
होलिका दहन के दौरान गेहूं की बालियों (धंगियों) की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि वर्ष की सबसे पहली फसल गेहूं होती है। इससे लोगों में खुशियों का संचार होता है। लोग अपनी खुशियां भगवान को होलिका के माध्यम से अर्पण कर हर वर्ष खुशहाली लाने के संकल्प करते हैं। इसलिए होलिका दहन के दौरान बालियां सेकी जाती है और उन्हें खाया जाता है।
बुराई मिटाने को होलिका दहन
राजा हिरण्याकश्यप भगवान का विरोधी था और चाहता था कि प्रजा उसकी पूजा करे। उसका पुत्र प्रहलाद घर में भगवान की पूजा-अर्चना करता था। हिरण्याकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठने के लिए कहा। होलिका भी आग में न जलने का वरदान होने के कारण निश्चिंत थी, लेकिन प्रहलाद बच गया और होलिका राख हो गई। तभी से बुराइयों के दहन के लिए प्रतीक होलिका किया जाता है,ताकि बिखरे खुशियों के रंग रंग व गुलाल खुशियों का प्रतीक मानी जाती है। होलिका दहन के एक दिन बाद धुलंडी के दिन लोग आपस में एक दूसरे को रंग व गुलाल लगाकर अपनी खुशियों को बांटते हैं। ऐसा माना जाता है कि अगर आज के दिन दुश्मन भी रंग लगा देता है तो वह दोस्त बन जाता है। होली के दिन लोग गले मिलकर अपने गिले-शिकवे भी दूर करते हैं।
बच्चें को भा रही हैं ये पिचकारियां
इस बार व्हेल फिश, हनुमानजी का घोटा, हॉकी, गणपति टेक, मगरमच्छ, टच्यूबलाइट वाली पिचकारी, टेंकर वाली पिचकारी (पीठ पर लगाने वाली), हातिमताई, वाटर गन, पोकोमैन के साथ ही देवी-देवताओं के मॉडल वाली पिचकारियां खास रहेंगी। बाजार 5 रुपए से लेकर 500 रुपए तक की पिचकारियां उपलब्ध है। बड़ी पिचकारियांे की डिमांड ज्यादा है।


