रानीवाडा । थार में मार्च माह में ही प्रचण्ड गर्मी शुरू होने से लोगों के पसीने छूट रहे हंै। विद्यालयों में सुबह दस से शाम के साढे चार बजे तक बैठना विद्यार्थियो के लिए मुश्किल हो रहा है। धूलभरी आंघियां चलने से जनजीवन अस्त व्यस्त हो रहा है। जिले में गर्मी का असर मार्च माह के दूसरे पखवाडे में प्रारंभ हो गया है। अघिकितम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। गुरूवार सुबह से ही सूर्य की तल्ख किरणें तन को चुभने लगी। दिन चढने के साथ पारा बढता गया। कोलतार की सडकों के तपने से दोपहर में बाजार में भीड कमजोर नजर आई।
मासूमों को सजा
सरकारी विद्यालयों में सुबह दस से साढे चार बजे का समय है। इस दौरान गर्मी तेज रहती है। अघिकांश विद्यालयों में न तो पंखे है और न ही पीने के लिए पानी की व्यवस्था। ऎसे में विद्यार्थियों के लिए विद्यालय में बैठना सजा से कम नहीं होता। दोपहर के भोजन के बाद प्यास बढ जाती है लेकिन गर्मी में विद्यालयों में ठण्डा पानी नसीब नहीं होने पर मासूमों की हालत खस्ता हो रही है।
मजदूर भी दुु:खी
नरेगा योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओ में कार्य करने वाले मजदूरों के लिए भी गर्मी परेशानी बनी हुई है। श्रमिकों के कार्य करने का समय दोपहर तक है। दोपहर में श्रम करना इनके लिए मुनासिब नहीं हो रहा है।
बिक्री बढी
बाजार में पंखे, कूलर और एयरकंडीशनर की बिक्री बढ गई है। शीतल पेय पदार्थ, आईसक्रीम की दुकानों में रंगत नजर आने लगी है। गर्मी के बढते प्रकोप के चलते इन दिनों जनजीवन बेहाली के दौर को झेल रहा है। तन झुलसाती सूरज की किरणें लोगों को दिन भर परेशान करती रहती है। सुबह दस बजे के बाद से इन दिनों सूरज की भृकुटियां तन जाती है। दोपहर में सूरज मानो आग का गोला बन जाता है। तेज धूप से डामर की सडकें तवे की तरह तपने लगती है। पसीने से लथपथ राहगीरों को कुछ कदम चलने के बाद ठंडी छाया में विश्राम लेने की इच्छा रहती है। क्षेत्र मे पिछले करीब एक सप्ताह से पारा उछाल पर है। गर्मी में दिनों दिन बढोतरी हो रही है।


